Friday, April 27, 2018

वक़्त के साये -Shadows Of Time Comments

Rating: 5.0

वक़्त की दहलीज़ पे जाने कितने ख़्वाब टूट गए
हर साया अपना बन कर आया हर साये के हाथ छूट गए

कुछ लम्हों की कुछ सदियों की इंतज़ार में ही तो गुज़री ज़िन्दगी है
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akshaya shah
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