क्या लिखूं, दिमाग में कुछ नहीं आ रहा है।
सोच में भी लॉकडाउन, जीवन स्थिर है।
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दुनिया की सबसे छोटी चीज़, सबसे भयंकर।
इंसान का बड़ा दिमाग भी देख नहीं पाता उसका रूप और आकार।
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पढ़ालिखा इंसान जब बैठा रहता है, तब लगता है शेर को किसी ने चिड़ियाघर में पकड़ के रखा है।
उसे जब नौकरी मिलती है तो लगता है ओलंपिक में कोई शूटर पदक जीत के आ रहा है।
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गर्मी में जब पसीना निकलता है, मैं बिना पानी से नहा लेता हूँ।
बिना कारण में जब मुसीबत आती है, मैं कोई अपराध न करके भी फँस जाता हूँ।
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डॉक्टर समाज की स्नायु है।
उनको जीने दो, अगर अपनी जिंदगी का स्पन्दन को महसूस करना है।
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इंसान की जो छाया है, वह भूत।
जब इंसान नहीं रहेगा, वह भी भागेगा खुद।
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भूत कभी भूत के साथ टकराता नहीं, लेकिन नेता टकराता है नेता के साथ।
भावना रहती है सोच में, लेकिन बाहर आती है सिर्फ बात।
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दुनिया का सबसे बड़ा घातक है गुस्सा।
ध्यान अभ्यास करो, नहीं तो अपनी जिंदगी लेगी अपने आप से हिस्सा।
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