Hemendra Singh Deopa

Veteran Poet - 1,053 Points (Pithoragarh)

The Way Of Love - Poem by Hemendra Singh Deopa

हम तो है मुसाफिर
हम चल दिए
जीवन के सफ़र में
इस लंबी डगर में,
ढूँढने हम चले,
न सोना न चांदी, न हीरे न मोती,
बस थोडा प्यार...
ओ मेरे यार ढूँढने हम चले सिर्फ प्यार।
ये दुनियादारी, दुनियादारी।
कोई राजा कोई भिखारी,
दौलत का नशा हैं जो सर पे भर के चढ़ा हैं,
है बस ये दुहाई, दुहाई...
प्यार क्यों यहां खो रहा हैँ।
कोई अपना नहीं, कोई पराया नहीं,
मुझको तो बस ये है कहना
पूरा करे हर कोई अपना सपना,
होगी सच क्या ये कहानी,
है ये दिल की जुबानी, जुबानी...
हम तो है मुसाफिर
हम चल दिए
जीवन के सफ़र में
इस लंबी डगर में,
ढूँढने हम चले,
न सोना न चांदी, न हीरे न मोती,
बस थोडा प्यार...
ओ मेरे यार ढूँढने हम चले सिर्फ प्यार।
यूँ तो है ये दुनिया के रास्ते,
होगी मंजिल कहाँ राह तकते, अपने वास्ते,
भटक रहे हैं, पर पाएंगे मंजिल यहाँ,
होगा अपना जहान,
प्यार से भरा।

Topic(s) of this poem: hindi, life, love


Comments about The Way Of Love by Hemendra Singh Deopa

  • (12/20/2015 3:52:00 AM)


    writing is so beautiful
    compared to hanging
    vines, maybe grapes
    whereas I write sitting
    on a line. it looks like
    there is correlations of
    this writing to neighboring
    countries like Thailand,
    Pakistan. china, Bengal,
    Burma, etc
    (Report) Reply

    0 person liked.
    0 person did not like.
Read all 1 comments »



Read this poem in other languages

This poem has not been translated into any other language yet.

I would like to translate this poem »

word flags


Poem Submitted: Saturday, September 19, 2015



[Report Error]