Ankit Vaghasiya

Rookie - 60 Points (19/05/1993 / vanthali)

Tu Bhi Nahi, Mai Bhi Nahii - Poem by Ankit Vaghasiya

ग़लतियों से जुदा तू भी नही, मैं भी नही,
दोनो इंसान हैं, खुदा तू भी नही, मैं भी नही...!
' तू मुझे ओर मैं तुझे इल्ज़ाम देते हैं मगर,
अपने अंदर झाँकता तू भी नही, मैं भी नही '...! !
' ग़लत फ़हमियों ने कर दी दोनो में पैदा दूरियाँ,
वरना फितरत का बुरा तू भी नही, मैं भी नही'

Topic(s) of this poem: mistake

Form: Limerick


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Poem Submitted: Tuesday, March 3, 2015

Poem Edited: Tuesday, March 3, 2015


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