राम मेरे राम...! Poem by Vidya Pandarinath

राम मेरे राम...!

राम मेरे राम
दर्शन को तेरे
तरस गए हैं हम.... मेरे नैन
तुम ही को पुकारे
तुम ही को पुकारे मेरी धड़कन
अखियाँ ढूंढे तुम्हीं को
तुम्हारे नाम जपे हम
आस्था का फूल चढ़ाये
दीया जलाये..आस्था के ज्योत जले
झिलमिलाते जगमगाते ज़िन्दगी खिले
मेरे मन में बसने वाले..मेरे प्रभु श्री राम
सिया के राम...तुम हो हम सब के राम



हर-एक के दिल मैं बसता हो तुम
हर एक के धड़कन में दहकते हो तुम
आस्था है तुम से
प्रेम है तुम से
लगाव है तुम से
विश्वास का बंधन है तुम से
अटूट रिश्ता है तुम से
चैन है तुम से
हर एक वक़्त तुम ही को पुकारे...
तुम ही को पुकारे...मेरे प्रभु श्री राम
सिया के राम...तुम हो हम सब के राम

हम तुम्हरी शरण आये
तुम्हरी शरण आये...
आपकी दया हम पर बनी रहे
चरणों में शीश झुकाए..
एक तेरा ही बरोसा...प्रभु श्री राम
सिया के राम...तुम हो हम सब के राम

राम मेरे राम...!
Tuesday, January 16, 2024
Topic(s) of this poem: god,blessing,thankfulness
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Lord Ram.. Jai Shree Siya Ram
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