मुस्कुराता...! Poem by Vidya Pandarinath

मुस्कुराता...!

कुछ कहना, अभिव्यक्त, भावना
यह खुशी या दुखद क्षण हो सकता है...!
विनीत, नाराज़, मूर्खतापूर्ण, पीड़न कामुक, धोका, देखना
यह नकली या असली हो सकता है...!

बच्चे की मासूम मुस्कान
दादा दादी की दांतहीन मुस्कान
यह खुशी और सुकून...भावना देता है
यह शुद्ध और वास्तविक...भावना देता है.

तुरन्त दिल से जोड़ा जाये...जैसा
प्यार बरसाना दिखावा नहीं.... वैसा

चोचला करते हुए हँसना बहनों के साथ
आरामदायक और स्वतंत्र महसूस करते हुए हँसना दोस्तों के साथ
स्वीकृति करते हुए हँसना अजनबि लोगों के साथ
चिड़चिड़ी करते हुए हँसना परेशान करने वाले लोगों के साथ
मजाक करते हुए हँसना मतलबी लोगों के साथ
सहानुभूति करते हुए हँसना सच्चे लोगों के साथ
दिखावा करते हुए हँसना नकली लोगों के साथ
प्रोत्साहन करते हुए हँसना निराश लोगों के साथ
लोगों
संतुष्टि करते हुए हँसना मददगार लोगों के साथ

गालों पर डिंपल हिलकोरे...आकर्षक मुस्कान
को और शानदार बनाता है
पल को खूबसूरत बनाता है

रोना आए या खुशी के आंसू..... थोड़े पाना
आँखों में आँसुओं के साथ मुस्कुराते हुए....थोड़े खोना

मुस्कुराते हुए रहना
मुस्कातातेहोवे सब कुछ सहना...!

मुश्किल समय में मुस्कुराना और सपनों को पूरा करना
जो भी है अपना है.....न अगर, मगर, वरना
मुस्कान... माहौल को रोशनी से भर देती है..अपने ही नूर
कोई भी....इससे........नहीं रह सकता खुद को दूर..

जिंदगी के अनमोल पल अपनों के साथ मुस्कुराते..इसे बनाएं बहुत ही खास
यही जीवन जीने की सच्चा और सही अंदाज़.... है!

Friday, October 28, 2022
Topic(s) of this poem: smile
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