यह यही पल है...! Poem by Vidya Pandarinath

यह यही पल है...!

जो भी हो
यह यही पल है
अगर यह चला गया है
केवल यादें रह जाती हैं...
जो भी हो
यह यही पल है

ऊह हू....ऊह हू....ऊह हू
ऊह हू...ऊह हू....ऊह हू


अगर यह पल चला गया तो
फिर जिंदगी भर अफ़सोस रहेंगे
इस पल के हमेशा के लिए


पल भर का है ये समा
इन लम्हों को करलो जमा
पल....जोहो चले गए... सो..चले गए
सिर्फ याद में रह गए...सिर्फ़..रह गए

जो भी किया
जो भी कहा
जो भी गया
जो भी हासिल किया
जो कुछ भी खोया
जो कुछ भी जीता
वाह पल....बन जाएगा...वही पल



अच्छा या बुरा
सही या गलत
सच या झूठ
उस समय या इस समय
मेरा या तुम्हारा
जो भी है...बस यही है

ऊह हू....ऊह हू....ऊह हू
ऊह हू...ऊह हू....ऊह हू

ये पल ये नज़ारे
हमारी है...
बीत गया जो
हम अफ़सोस करेंगे
कल...ये पल ये नज़ारे..
केवल स्मरण बन जायेगा...


ऊह हू....ऊह हू....ऊह हू
ऊह हू...ऊह हू....ऊह हू

इस पल जी रहे हैं
इस पल जी रहे हैं
यह पल ही सब कुछ है
दिल में हमेशा रहेगी

ऊह हू....ऊह हू....ऊह हू
ऊह हू...ऊह हू....ऊह हू

यादें मोतियों के हार जैसी
प्रत्येक मोती की विशिष्ट कहानी है
कही और की गई बातें
भावों की डोर से जुड़ गया...मिश्रित. हो गया
हमेशा विचारों से जुड़े
भावनात्मक रूप से...जुड़ा है
इस पल जी रहे हैं

ऊह हू....ऊह हू....ऊह हू
ऊह हू...ऊह हू....ऊह हू

संजो लो...इस से
जी ले..इस से
अपनी पल.. सच से
अपनी तरह से...दिल से

ऊह हू....ऊह हू....ऊह हू
ऊह हू...ऊह हू....ऊह हू

Wednesday, May 31, 2023
Topic(s) of this poem: life
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