जय श्री राम..! Poem by Vidya Pandarinath

जय श्री राम..!

जय श्री राम
सीता के राम
तुम हो सब के राम
तुम हो हमारे राम... प्रभु श्रीराम
हमारे प्रभु श्रीराम...तुम हो सब के राम


तुम से है धर्म का राह
सत्य और वचन का पालन
मर्यादा है जिसके कान में
राम तुम हो तो क्या आशंका

जय श्री राम
सीता के राम
तुम हो सब के श्री राम...प्रभु श्रीराम
हमारे प्रभु श्रीराम...तुम हो सब के राम


ध्यान में तुम हो
दिए के ज्योति में तुम हो
फूल लो के कुशबो में तुम हो
चमके होव सूरज में तुम हो
बेहते होव नदियों में तुम हो
नीले आसमान में तिरती होव बादलों में तुम हो
सभी पत्तों और फूलों में तुम हो..
सभी पक्षियों और जीव में तुम हो... ही हैं
फिजा...हवा में तुम हो... ही हैं
अंश...हर अंश में तुम हो... ही हैं
सिया के राम...तुम हो हमारे श्री राम

जय श्री राम
सीता के राम
तुम हो सब के श्री राम...प्रभु श्रीराम
हमारे प्रभु श्रीराम...तुम हो सब के राम

धर्म के साथ प्रेम, सेवा, सहायता
तुम ही हो मेरी आदर्श हो...
सत्य की राह में चलने की प्रेरणा
तुम ही हो मेरी आदर्श हो..


वचन निभाना तुम से ही सीखा
तुम ही हो मेरी आदर्श हो....
प्रेम को अंतिम साँस तक रिश्ता निभाना
तुम ही हो मेरी आदर्श हो...

बिना किसी भेदभाव
सभी को एक समान मानना..तुम से ही सीखा
तुम ही हो मेरी आदर्श हो...
सिया के राम...तुम हो हमारे राम
सिया के राम...तुम हो हमारे राम


नाम में तेरी है जानकी राम
ओह राम तुम हो हम सब के राम
जय श्री राम
सीता के राम
तुम हो सब के श्री राम
तुम हो हमारे श्री राम

नाम में है तेरे....
है एक अद्बोध ताकत....
सभी संघर्षों से मुक्ति
सभी रोगों का इलाज
सारी कठिनाइयां दूर हो जाती हैं
जब भी मैं तुम्हारा नाम लेता हूँ
श्री राम तेरे नाम में है वो शक्ति
जाप ने से तेरे नाम...श्री राम
हो जाये हर इच्छा पोरी
जीवन के हर चिंता से मुक्ति
हर डर का समान करने की शक्ति
जाप ने से तेरे नाम...श्री राम
मिल जाती है एक अनोखी शक्ति


जय श्री राम
सीता के राम
तुम हो सब के श्री राम...प्रभु श्रीराम
हमारे प्रभु श्रीराम...तुम हो सब के राम

जय श्री राम..!
Tuesday, January 16, 2024
Topic(s) of this poem: god
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Jai Shree Ram
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