है.. में कहते हूँ...! Poem by Vidya Pandarinath

है.. में कहते हूँ...!

मैं कहती हूँ...
वे कहते हैं मुझसे
दिल की नहीं दिमाग की सुनो
मैं कहती हूँ...
दिल भी मेरा है
दिमाग भी मेरा.....
जिस की भी सुनो....
मेरी 'सोच' है | मेरी एहसास है
वे कहते हैं मुझसे....
वो कहते हैं.....कहते हैं.....

वे कहते हैं मुझसे
धीमी आवाज में बात करो
ऊँची आवाज मे बात मत करो
मैं कहती हूँ...
आवाज मेरी है....मेरी आवाज मेरी ताकत है
मेरी आवाज़ भी बुलंद है..और मैं भी
मैं झुकूंगा नहीं....बुलंदी से बोलूँगी...
सही का मतलब सही है
गलत का मतलब गलत है
मैं कहती हूँ...
मैं अपनी राय दूंगा...हमेशा....


वे कहते हैं मुझसे....
वो कहते हैं.....कहते हैं.....
वे कहते हैं मुझसे...
ऐसा करो वैसा मत करो...
ऐसा करो...ऐसा मत करो
मैं कहती हूँ...
मैं अपने लिए अच्छी चीजों को परिभाषित करूंगा..
किसी और की सम्मति मेरे लिए नहीं....
मैं कहती हूँ...
मैं किसी और की नहीं हुड़की सुनोगे....


वे कहते हैं मुझसे....
वो कहते हैं.....कहते हैं.....
वे कहते हैं मुझसे....
वो कहते हैं.....कहते हैं....
उन्हें सुनो.. इनकी सुनो... में क्यों सुनो
मैं कहती हूँ...
ज़िन्दगी मेरी है.. मैं अपने लिए जीऊंगा
अपनी तरह ही जियेंगे..
में अपनी मनकी सुनूँगी...
वे कहते हैं मुझसे....
वो कहते हैं.....कहते हैं....
वे कहते हैं मुझसे....
वो कहते हैं.....कहते हैं....
ये करो...वह करो..
क्यों करो में...
मैं कहती हूँ...
मैं किसी और से ज्यादा खुद पर भरोसा करता हूं...

वे कहते हैं मुझसे....
वो कहते हैं.....कहते हैं.
वे कहते हैं मुझसे....
वो कहते हैं.....कहते हैं...
ऐसे जियो...वैसे जियो....
किस लिये...मैं क्यों सुनूं.....
मैं कहती हूँ...
मेरी ज़िन्दगी... में खुल के जियो..जियूँगी....

वे कहते हैं मुझसे....
वो कहते हैं.....कहते हैं.
में कहती हूँ सब से...
मेरा दिमाग.. मेरा दिल जानता है..
मेरे लिए क्या अच्छा है... क्या ठीक है
गलत क्या है.. मेरे लिए क्या सही है
मैं किसी और से ज्यादा खुद पर भरोसा करता हूं
मुझे अपनी निर्णय लेने की क्षमता पर भरोसा है...
यह अहंकार नहीं है मेरा...
मेरी शक्ति मेरा आत्मविश्वास है...
मैं यह कहने से नहीं डरता कि
जो गलत है वह गलत है...
सही तो सही है...
मैं अपने विचारों पर भरोसा करता हूं
और उनका पालन करता
में कहती हूँ...
है.. में कहते हूँ...

मेरी गमण्ड नहीं सोच है...
मेरे विचार..मेरे ख्याल..है..
मैं बिना किसी हिचकिचाहट
स्वतंत्र रूप से अभिव्यक्त करुँगी..
में कहती हूँ...
है.. में कहते हूँ....

में सब की परवाह करती हूँ...
पर सिर्फ अपनी की करथि हो..
मनन की सुनता है...
में कहती हूँ...
है.. में कहते हूँ....
है.. में कहते हूँ....!

Monday, December 18, 2023
Topic(s) of this poem: life
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