अल्फ़ाज़ Words Poem by Ahatisham Alam

अल्फ़ाज़ Words

जान मांगते तो शायद हंसकर दे देता वो
जो मेरी आँखों का एक ख्वाब दे न सका
कई हक़ जो जताने का बहाना करता है
मेरी एक मोहब्बत का जवाब दे न सका

मोहब्बत में सरशार होंने का दावा तो वो भी करता है
अल्फ़ाज़ से मेरा हमदर्द होने का दिखावा तो वो भी करता है
शबोरोज़ उसकी याद में समंदर बहा दिए हमने
आज वो मेरे एक क़तरा आँसू का हिसाब दे ना सका

Monday, February 29, 2016
Topic(s) of this poem: love
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