रूह की गुंजाइश Poem by Zishan Shah

रूह की गुंजाइश

अपनी रूह की गुंजाइश में,
कविताओं की ख़ोजश करते हैं।
शब्दों के सहारे नए सपने बुनते हैं,
भावों को रचनाओं में पिरोते हैं।

कहानियों की धूमिल सियाही में,
ज़िंदगी की कहानी छिपी होती है।
अनदेखी ख़ुशियों को जगाने के लिए,
कविताओं की पंक्तियों का सहारा लेते हैं।

रूह की उचाईयों को छूने का इरादा,
काव्य के समुद्र में डूबते हैं।
विचारों की लहरों में नौका चलाते हैं,
रूह की गुंजाइश को प्रकट करते हैं।

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