Zishan Shah Poems

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1.
रूह की गुंजाइश

अपनी रूह की गुंजाइश में,
कविताओं की ख़ोजश करते हैं।
शब्दों के सहारे नए सपने बुनते हैं,
भावों को रचनाओं में पिरोते हैं।
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