Praveen Pandey


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Best Poem of Praveen Pandey

बिखरे शब्द

<इस कविता में मैंने वृद्धा आश्रम में रह रहे लोगो को विभिन्न शब्दों के रूप में स्थापित किया हैं
और कोशिश की हैं उस पल को आपसे मिलाने की, सुक्रिया।>

'बिखरे शब्द '
अनेकों बार दिखते थे
आते जाते लडखडाये दरवाजे से
कमरे में पड़े वो बिखरे शब्दों के मंजर
खंडहर सी हो चली थी
कुछ टूटे, कुछ फूटे पर गहरइयो में डूबे
समेटना मुश्किल था भावों के जोड़ने के संग
टिके थे कुछ शब्द दीवार से वोटे लगाये
मनो बया कर रहे हो कोई सहारे का कलम बन मुझको खड़ा कर जाये
कुछ और भी थे जो बिल बिलाए से
रुआसे हुए झुर्रियों लिए
शायद बता रहे हैं मलाल अब भी, न चुने जाने...

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