I, Rajnish Rajan, Born from the sacred dust of Birnoudh, Bhagalpur. My upbringing was in the heart of the Angika region has deeply influenced my thinking and my words.
ग़ज़ब का इश्क है ' मोहब्बत',
ये दिल की कज-अदाई है.......।
नज़ाकत-ए-पुरजोश तेरा मिजाज,
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बिगड़ी चाल उन रातों की है बात,
फिरकी सिसकियां साये के साथ।
सारी रातें, उड़ती नींदें, आंसू हाथ,
कराहती बातें और बहती सी याद।
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चैत्र प्रतिपदा की है ये अद्भुत महिमा,
धरती सूरज की करती पूरी परिक्रमा।
चैत्र मास शुक्ल के सूर्योदय से,
करें नव वर्ष की नव संरचना।
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'मस्तूर! तेरे नूर का इक़बाल है, महफ़ूज़ रहना;
ऐ मेरी ग़ज़ल-चश्म, तू चश्म-ए-बद-दूर रहना।'
'तू साहिर और तेरा अफ़्सूँ, सुन हुस्न-ए-बेपरवाह;
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जो हाथ में आया अपना है,
छोड़ो उसको जो छूट रहा।
अपना कौन यहाँ है तेरा?
गैरों से भरा ये पिंजड़ा है।
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