Rishabh Shukla Rishi

Rishabh Shukla Rishi Poems

सुबह हो या शाम,
हर जगह दीखता है.
हर गली, नुक्कड़ और चौराहो,
पर बिकता है.
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The Best Poem Of Rishabh Shukla Rishi

युवाओं का गैजेट प्रेम

सुबह हो या शाम,
हर जगह दीखता है.
हर गली, नुक्कड़ और चौराहो,
पर बिकता है.

कुछ छोटा सा या बड़ा,
आकर्षित करता हुआ.
सभी का मनोरंजन,
करता है.

हम (युवाओं)के जीवन,
के अंग इस प्रकार है.
एक छोटा परन्तु अद्भुत,
वस्तु मोबाईल,
जो आक्सीजन का कार्य करता है.

दिन में कई बार,
फिल्मी गीतो के साथ बजता है.
अगर थोड़ी देर के लिए भी,
गम हो जाए तो,
ह्रदय बहुत तेजी से धड़कता है.

दूसरे प्रमुख अंग को हम,
कंप्यूटर कहते है.
यह हमारे जीवन में,
रक्त का कार्य करता है.

सभी बच्चो की जिज्ञासा,
का हल इंटरनेट करता है.
और दैनिक जीवन में,
विटामिन और प्रोटीन का कार्य करता है.

बच्चो में बुक नामक,
रोग मिले या न मिले,
फेसबुक नामक,
डायबटीज जरूर मिलता है.

जो पहले जिज्ञासा,
से शुरू होकर बढती जाती है.
और यह निरंतर बढता जाता है.

उपर्युक्त बताये गए सभी,
तत्व महत्वपूर्ण है.
सवस्थ जीवन के लिए इनका,
नियमित और सही मात्र में,
सावन जरूरी होता है.

@ऋषभ शुक्ला

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