युवाओं का गैजेट प्रेम Poem by Rishabh Shukla Rishi

युवाओं का गैजेट प्रेम

Rating: 5.0

सुबह हो या शाम,
हर जगह दीखता है.
हर गली, नुक्कड़ और चौराहो,
पर बिकता है.

कुछ छोटा सा या बड़ा,
आकर्षित करता हुआ.
सभी का मनोरंजन,
करता है.

हम (युवाओं)के जीवन,
के अंग इस प्रकार है.
एक छोटा परन्तु अद्भुत,
वस्तु मोबाईल,
जो आक्सीजन का कार्य करता है.

दिन में कई बार,
फिल्मी गीतो के साथ बजता है.
अगर थोड़ी देर के लिए भी,
गम हो जाए तो,
ह्रदय बहुत तेजी से धड़कता है.

दूसरे प्रमुख अंग को हम,
कंप्यूटर कहते है.
यह हमारे जीवन में,
रक्त का कार्य करता है.

सभी बच्चो की जिज्ञासा,
का हल इंटरनेट करता है.
और दैनिक जीवन में,
विटामिन और प्रोटीन का कार्य करता है.

बच्चो में बुक नामक,
रोग मिले या न मिले,
फेसबुक नामक,
डायबटीज जरूर मिलता है.

जो पहले जिज्ञासा,
से शुरू होकर बढती जाती है.
और यह निरंतर बढता जाता है.

उपर्युक्त बताये गए सभी,
तत्व महत्वपूर्ण है.
सवस्थ जीवन के लिए इनका,
नियमित और सही मात्र में,
सावन जरूरी होता है.

@ऋषभ शुक्ला

युवाओं का गैजेट प्रेम
Friday, July 6, 2018
Topic(s) of this poem: hindi
COMMENTS OF THE POEM
Naila Rais 07 July 2018

A nice write.... Reality it is... Gadgets should be controlled by us before they control us...10 +++... Amazing... You may like to read my poems and express your views too.. Naila

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