Satish Satyarthi


Satish Satyarthi Poems

1. Jameen Ke Dhage 6/9/2013
Best Poem of Satish Satyarthi

Jameen Ke Dhage

जिस जमीं पे हरियाली को लाने,
बढ़ चला गगन बादल को पाने ।
सह नहीं सके तनाव दूरी के
ऊँच गगन की मजबूरी के
गए टूटते उसी ज़मीं से
रिश्ते के धागे किसी बहाने ।।
बढ़ चला गगन ़़ ़़़़ ़ ़

बिन धागों के आसमाँ से उतर नहीं जब पाता हूँ,
ऊँच गगन के गोद से उन धागों को ललचाता हूँ,
बादलों की समृद्धि पे झूठ मूठ इठलाता हूँ,
धागों को उनके उलझन की बीती बात बताता हूँ,
वो अति दूर हैं सुनने को,
ये बात समझ ना पाता हूँ ।।
बिन धागों के आसमाँ से ़़ ़ ़ ़

क्या मिला मुझे इन बादल से, जो हवा में गोते खाते हैं ।
बिन धागों के, आज़ादी में, यहाँ वहाँ मँडराते हैं ।
न ...

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