Satyam Kumar Tiwari


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Best Poem of Satyam Kumar Tiwari

ज़िन्दगी

बहती हुई नदी में देखा मैने एक नाव
थोड़ा टूटा, थोड़ा फूटा, शायद खुद से रूठा
चलता चला जा रहा था

देखकर उसे मुझे हुआ थोड़ा अचंभा
की आखिर उसे चला कौन रहा था

आगे जाकर देखने की कोशिश की
पर देख न पाया
जैसे वो खुदको मुझसे छुपा रहा था

उसके साथ चलते-चलते
मैं पहुँच गया वहाँ
बड़ी नुकीली चट्टानें
होती थी जहाँ

चट्टानों को देख
मैं सोचने लगा ऐसे
आखवखिर अब ये
आगे जाएगा कैसे

मेरे सोचने तक
वह पहुँच गया बहुत दूर
थोड़ी देर में कुछ आवाज़ आई
पता चला वह नाव
हो गई थी चूर

बहुत ढूँढा मैंने उसके नाविक को
पर ढूँढ न पाया ...

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