काँटों के सौदागर भी फूल बिछा सकते है,
आपके दुश्मन भी प्यार बरसा सकते है,
लड़ाई-झगड़ा हर समस्या का हल नहीं प्यारे,
छमा करने से सब तेरी मुरीद हो जा सकते है,
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माँ का नटखट गोपाला,
बड़े नाजो से उसको था पाला,
फुदकता, खेलता इधर-उधर,
ढूंढती परेशान हो माँ ना जाने किधर।
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सूरज सा तेज प्रकाश है,
शत्रुओ का जो बिनाश है,
जग माने जिसका लोहा,
जिससे धरा,
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परिंदे की ख्वाहिशहै,
खूबसूरत चाँद को पाने की,
फिकर न है उसको
अब इस जमाने की,
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अपनो का दामन छोड़,
गैरों के जो गले मिलते है।
क्या रेगिस्तान में देखा,
कभी कमल खिलते है।
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मानवता का गला घोंट कर,
कायरो ने किया है वार।
हे भारत के वीर सपूतों,
निकालो अपनी तलवार।
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ढूंढो कोई उनसा कहीं,
गैर होकर भी जो अपना सा हो,
जिनकी हँसी दिल मे बसे,
हकीकत भी मानो,
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Ek Bat Hamari Aaj Suno,
Ek Sapna Tum Bhi Aaj Buno, Padhegi Beti, Badhegi Beti,
Aisi Tum Aaj Rah Chuno.
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Yado Ki Dariyan Me Jab Man Gote Khata Hai,
Kavi Dil Jor Se Hasta To Kavi Ro Jata Hai,
Na Bhula Sakte Papa Ka Hanth Tham Kar Chalna Sikhna,
Khiloone Ki Jid Me Unhe Apni Tarf Khinchna,
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आँधिया रास्ते क्या रोकेंगे,
ये खुद तूफान से चलते हैं।
हर जर्रे कांपते है जनाब,
जब आर्मी गस्त पे निकलते है।
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