जो दो होकर भी दिल से एक थे,
जो दूर होकर भी ह्रदय से पास थे,
वो जैसे प्रेम शब्द का ही भावार्थ है,
वो प्रेम के पुजारी सिर्फ 'राधाकृष्ण'' है ।।
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जो दो होकर भी दिल से एक थे,
जो दूर होकर भी ह्रदय से पास थे,
वो जैसे प्रेम शब्द का ही भावार्थ है,
वो प्रेम के पुजारी सिर्फ 'राधाकृष्ण'' है ।।
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