Shashikant Nishant Sharma

Rookie (03 September,1988 / Sonepur, Saran, Bihar, India)

कलम का दम - Poem by Shashikant Nishant Sharma

एक कलम में हैं कितना दम
जब चलती आक्रोश में
तब बन जानती हैं बम
जब चलती नफरत की आवेश में
गिराती हैं दिल पे सितम
बिना चलाये कलम
नहीं लिख पते दिल की बात
कलम में हैं कितना दम
बिना बोले कह देता सब बात
जब चलती सहानुभूति में
दिल की अनुभूति में
तब बन जाती हैं मलहम
भर देती हैं सब जख्म
जब चलती हैं प्यार से
तब कर देती हैं ख़तम
सरे गिला-शिकवा
एक कलम में हैं कितना दम
शशिकांत निशांत शर्मा 'साहिल'


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Poem Submitted: Thursday, March 21, 2013



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