Anup Prakash

Rookie - 49 Points (09 march 1999 / Lakhisharai)

काश! मेरी भी कोई बङी बहन होती - Poem by Anup Prakash

काश! मेरी भी कोई बङी बहन होती
जो मुझे डाँट-डाँट के पढाती
बार-बार पढने को कहती
जो मेरी कठिनाइयोँ को सुनती
और वह खुद कठिनाइयोँ का हल भी करती

जो मेरी सारी होमवर्क भी कराती
सारी कठिनाइयोँ को दुर भगाती
मम्मी-पापा के डाँट से बचाती
फिर मुझे वह खुद डाँटती
चॉकलेट देकर फिर वह मुझे मनाती

वह मुझे हर चीज सीखाती
सीखते-खाते, खेलते-झगङते
एक-दुसरे के सुख-दुःख बाँटते
घर मेँ खुब मौज-मस्ती करते

साथ-साथ बाहर घुमने जाते
आइसक्रीम-गोलगप्पे साथ-साथ खाते
मेले मेँ उधम कचङ मचाते
वहाँ पर खुब मौज-मस्ती करते


Comments about काश! मेरी भी कोई बङी बहन होती by Anup Prakash

  • Gold Star - 36,508 Points Gajanan Mishra (3/28/2014 2:41:00 AM)

    wonderful writing Anup, thanks, do write more. (Report) Reply

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Poem Submitted: Friday, March 28, 2014

Poem Edited: Friday, March 28, 2014


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