indu rinki verma


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Best Poem of indu rinki verma

मां मुझे डर लगता है

मां मुझे डर लगता है.... बहुत डरलगता है....सूरज की रौशनी आग सी लगती है....
पानी की बुँदे भी तेजाब सी लगती हैं....
मां हवा में भी जहर सा घुला लगता है....मां मुझे छुपा ले बहुत डर लगता है....
मां याद है वो काँच की गुड़िया, जो बचपन में टूटी थी....
मां कुछ ऐसे ही आज में टूट गई हूँ....
मेरी गलती कुछ भी ना थी, माँ फिरभी खुद से रूठ गई हूँ....
माँ बचपन में स्कूल टीचर की गन्दी नजरों से डर लगता था....
पड़ोस के चाचा के नापाक इरादों से डर लगता था...
माँ वो नुक्कड़ के लड़कों की बेवकूफ बातों से डार लगता है....और अब बोस के वह शी इशारों से डरलगता है....
मां मुझे छुपा ले, बहुत डर लगता ...

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