Nitin Kumar Poems

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1.
प्रेम एक - कर्म दर्पण

अब तो मुझे प्रेम एक दर्पण जैसा लगता हैं
दर्पण मे ख़ुद की ही आकृति मुझसे कहती
उसे छूने से पहले अपने आप को देख ले
क्या परिपूर्ण हैं उस आईने को छूने के लिए
...

परिपक्य होना हैं 😟
मुझे जाना होगा ठलना होगा इस जीवन के पैमाने में
जलना हैं इस जीवन की ज्वाला में,
बहोत दूर..., बहोत दूर तक जलना हैं!
...

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