Dr. Navin Kumar Upadhyay


आँखें और जिगर की दोस्ती - Poem by Dr. Navin Kumar Upadhyay

आँखें और जिगर की दोस्ती कितनी भली, यार,
एक दूजे से कभी न जुदा होतें हैं।
ऐसी ही बन जाती, यदि हम दोनों की,
कि एक -दूजे बिना न कभी भी रह सकते हैं।।

Topic(s) of this poem: love


Comments about आँखें और जिगर की दोस्ती by Dr. Navin Kumar Upadhyay

  • Kumarmani Mahakul (11/13/2017 10:58:00 AM)


    आँखें और जिगर की दोस्ती कितनी भली, यार,
    एक दूजे से कभी न जुदा होतें हैं।
    ऐसी ही बन जाती, यदि हम दोनों की,
    कि एक -दूजे बिना न कभी भी रह सकते हैं।।.. . nice theme. Fantastic expression. Beautiful poem. Thank u sir for sharing.
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Poem Submitted: Monday, November 13, 2017



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