sanjay kumar maurya

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तू किनारे से हाथ देगा - Poem by sanjay kumar maurya

तू किनारे से हाथ देगा मुझे लगता नहीं
तू मेरा साथ देगा मुझे लगता नहीं

ऐ मौत कभी तो आएगा इतना मुकर्रर है
मगर मुझे मात देगा मुझे लगता नहीं

मैं अगर भरोसा करुं तो भरोसा टुट जाएगा
वो सहारा एक रात देगा मुझे लगता नहीं

अब टुटकर भी ये दिल उसे चाहता क्यूं है
वो दामन में कुछ लमहात देगा मुझे लगता नहीं

किसी तूफाॅ से रहम की उम्मीद क्यूं करें भला
ये खुशियों का सौगात देगा मुझे लगता नहीं

हौसला चाहिए तो परिंदों की उड़ान में ढ़ूॅढ़
वरना आदमी जज्बात देगा मुझे लगता नहीं

Topic(s) of this poem: poem


Comments about तू किनारे से हाथ देगा by sanjay kumar maurya

  • Rajnish Manga (9/5/2015 7:51:00 AM)


    तू किनारे से हाथ देगा मुझे लगता नहीं
    तू मेरा साथ देगा मुझे लगता नहीं
    आपकी इस ग़ज़ल में अच्छी कविता के सभी तत्व मौजूद हैं, मित्र. इसे यहाँ शेयर करने के लिए आपका आभार.
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Poem Submitted: Saturday, September 5, 2015



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