Hasmukh Amathalal

Gold Star - 390,107 Points (17/05/1947 / Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India)

पभु के नाम से - Poem by Hasmukh Amathalal

पभु के नाम से

मोहे कालो रंग खूब भायो
जब मुरली को तूने बजायो
में दौड़ो दौड़ो चलो आयो
तूने भी मुझे खूब नाच नचायो

प्यास बुज गयी और सही सुख पायो
नैनो को सुकून मिला और चेन घणो पायो
आतम खूब राजी हुओ, नैनो मा आसु भर आयो
सच कहूँ मे आज भी, तुझे जान ना पायो।

मैंने सांवलेपन में क्या क्या देखा?
ना खिंच पाया कोई मन मे रेखा
बस अपलक नजरो से, मे देखता ही रहा
मन ने तो बस पाही लिया, जो दिल ने भीतर से चाहा।

ऐसे क्या है तेरे मे छिपे गुण?
जब तु बजावे मुरली की धुन
सब काम अपने छोड़े, तुझे सुंन ने के लिए
बस अब तो करीब पा लिया, जी भर देखने के लिए,

तू बना है सब की जान, घट में बसने के लिए
तेरा नाम लेके हम, अखियाँ बिछाए है
हम है देहे है अनेक पर तू साया बना हुआ है
गोकुल बना कृष्णमय जब से तु यहाँ आया है।

सांवले ने सबको खुश ओर मुग्ध कर दिया
सब के दिलो में अपना नाम कायम कर लिया
उसका बचपन ही था ऐसा सब को मन से भा गया
'सांवले की हरकतों' से भी, पभु के नाम से जाना गया

अब धुन चाहे कहीं भी बजे
ओर राधे राधे करने लगे
हम भी मिलाएं सुर
नशे में ना हो कभी चूर

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Poem Submitted: Monday, January 18, 2016



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