Ashok kumar maurya

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मै मेरी यादें और तुम - Poem by Ashok kumar maurya

मेरी यादो के टुकडे, तुम जोडते रह जाओगे ।

मै तो दरिया हूँ, मेरी धार तुम रोकते रह जाओगे ।

याद आऐंगे तुम्हे वो हसीन लम्हे गुजरे ।

मै आँसू बन के बहूंगा, तुम पोछते रह जाओगे ।

तेरी आबाद दुनिया का मै एक फूल था ।

तुम्हे तो अपने महकते हुस्न पर गुरूर था ।

अब तो नही होते सहन शनम तेरे नखरे ।

मै जहाँ से चला जाऊँगा, तुम रोकते रह जाओगे ।

मैने हर जुल्म सहे तेरे दिल मे जगह पाने को ।

मैने तो विष पिया अमृत तुम्हे पिलाने को ।

मै तो रग - रग मे बसा हूँ दिलरूबा तेरे ।

बसेरा था दिल मे किसका तुम पूछते रह जाओगे ।

मै तो दीपक था, काश तुम लौ बन गई होती ।

सदियों तक जलती सदा मेरे प्रेम की ज्योति ।

मै तो अब पिघलता हूँ, मोम सा धीरे-धीरे ।


मै वक्त सा गुजर जाऊँगा तुम देखते रह जाओगे ।

चाँदनी रातो की रोशनी तुम्हे याद आएगी ।

तब अकेलेपन की आहट तुम्हे अक्सर सताएगी ।

बादलों से झड के ओस सा सूख जाऊँगा सबेरे ।

मै हलक से उतर जाऊँगा तुम सोचते रह जाओगे ।

सृजन- अशोक

Topic(s) of this poem: love

Form: Lyric


Comments about मै मेरी यादें और तुम by Ashok kumar maurya

  • Rajnish Manga (12/3/2015 6:42:00 AM)


    मेरी यादो के टुकडे, तुम जोडते रह जाओगे ।
    मै वक्त सा गुजर जाऊँगा तुम देखते रह जाओगे।.... आपकी अभिव्यक्ति में गंभीरता है और शैली में व्यापकता है. बहुत बहुत धन्यवाद. कुछ शब्द सुधार लें जैसे शनम = सनम / मैने हर जुल्म सहे = मैंने हर ज़ुल्म सहा / झड = झड़
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Poem Submitted: Thursday, December 3, 2015



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