मेरे आंसुओं की सेज पर Poem by Ahatisham Alam

मेरे आंसुओं की सेज पर

मेरे आंसुओ की सेज पर
ये हसरत भी मर जायेगी
फिर ज़िन्दगी की तलाश में
ये शब यूँही गुज़र जायगी

तुम ही दर्द की वजह भी हो
तुम ही दर्द की दवा भी हो
तेरे एक फैसले की देर है
मेरी हस्ती फिर संवर जायगी


जीना तो खुशनसीबों का काम है
यहाँ ज़िन्दगी सिर्फ सांस चलने का नाम है
ये वजूद मेरा वो राख है
तेरी न पे जो बिखर जायेगी
मेरे आंसुओं की सेज पे
ये हसरत भी मर जायेगी।

Saturday, June 4, 2016
Topic(s) of this poem: love
COMMENTS OF THE POEM
Amar Agarwala 04 June 2016

I liked your verses... Ahatisham.

0 0 Reply
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Close
Error Success