मेरे मन पर Poem by Kezia Kezia

मेरे मन पर

Rating: 5.0

जमा हुआ है

मेरे मन पर

तुम्हारा प्रेम शैवाल बनकर

कुछ बूंदे भर

अश्रु की काफी हैं

इसे फिर से हरा

करने के लिए

***

Monday, September 21, 2020
Topic(s) of this poem: love,tears
COMMENTS OF THE POEM
Rajnish Manga 21 September 2020

कम शब्दों का प्रभावशाली उपयोग. अति सुंदर.

0 0 Reply
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Close
Error Success