Kezia Kezia

मैं मुझ में खोया रहा - Poem by Kezia Kezia

मैं निहारता रहा,
वो मुस्कुराती रही।
मैं सुनता रहा,
वो गुनगुनाती रही।
मैं बैठा रहा,
वो इठलाती रही।
मैं कहता रहा,
वो सुनती रही।
मैं बिगाड़ता रहा,
वो बुनती रही।
मैं बनाता रहा,
वो सजाती रही।
मैं बिखराता रहा,
वो समेटती रही।
मैं धैर्य खोता रहा,
वो हौसला बढ़ाती रही।
मैं मुझ में खोया रहा,
वो मुझ में खुद को ढूँढती रही।

Topic(s) of this poem: philosophical

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Poem Submitted: Saturday, November 9, 2019

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