कुछ कहती है ये बहती हवा
लाती कोई साया
करती कोई आहट
साये को नहीं पहचान पाती
फिर आगे बढ़ जाती है ये हवा
कई चित्र समेटे
बंद दरवाजे से टकरा कर
चली जाती हैं
इन बेसुध बादलों के घरोंदों में
कोई रहता ही नहीं हो जैसे
घेर कर इन्हें
बरसने को मजबूर करती
कुछ कहती है ये बहती हवा
अपनी ही मस्ती में यूँ बहती है ये हवा
तोड़ फांद कर हर डगर
चल देती है लहर लहर
बूंदों को बांध कर मेरे आँगन तक
लाकर क्यों छोड़ जाती है ये हवा
क्या है इसकी कोई वजह
ये क्यों बहती है गुमसुम सी हवा
या कुछ कहती जाती है
ये चंचल हवा
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