'अपने अपने हिस्से का आसमान हर कोई चाहता है
कुछ खास तरीके से उसे सजाता है
आये दिन के मुश्किलों से उसे बचाता है
अपने हिस्से के आसमान को हर ओर से निहारता है
उस आसमान की तारीफ में खुदा से भी भीड़ जाता है
अपने आसमान को अपने अपने रंगों से रंगता है
खुद को मार कर कई बार आसमान को जिन्दा रखना चाहता है
अपने हिस्से के आसमान पर सब कुछ न्यौछावर कर देता है
काले बादलों की परछाईयों से उसे बचाता है
अपने अपने हिस्से का आसमान बहुत सुहावना होता है
आसमान को बचाने के लिए खुद को खपा देता है
फिर एक दिन सौप जाता किसी और को
उस आसमान को जिसे तन मन से संवारा था
जान देकर बचाया था, किसी और को देकर जिसे बढ़ जाना है
फिर किसी और आसमान का छोर थामना है
अपने आसमान के मोह से हर बार खुद को उबार लाना है
उस आसमान के तारों को चुन चुन कर
एक दिन औरों का आशियाना सजाना होता है
किसी के लिए सपना तो किसी के लिए अपना भी होता है
अपने अपने हिस्से का आसमान बहुत सुहावना होता है'
********
This poem has not been translated into any other language yet.
I would like to translate this poem
अत्यंत सुन्दर कविता. आपने सही कहा कि व्यक्ति जीवन भर अपने लिए एक ऐसी जगह ढूंढता है जो उसके सपनों का मूर्तरूप हो. इस जगह को आसमान भी कह सकते हैं. अपने हिस्से का आसमान. धन्यवाद.