वो लिसलिसा एहसास
आज फिर एक बार ढूँढता हूँ
वो लिसलिसा एहसास
जो मेरी इंद्रियों को सम्भाले था
जो नौ महिने मेरा आवरण था
जो धूप छांव से मुझे बचाता था
जो हर घड़ी नई जान फूंकता था
अपने लहू से परवरिश करता था
जो भूख प्यास में मुझे सिझाता था
वो लिसलिसा सा अह्सास
आज फिर एक बार खोजता हूँ
बहुत अकेला हूँ बहुत थका हूँ
माँ एक बार फिर
अपनी कोख मे मुझे पनाह दे
उस अह्साह को फिर से जगा दे
वो बेइंतिहा सुकून के पल
फिर से एक बार दोहरा दे
दुनिया की इस जहरीली आबो हवा से
मुझे बचा ले
इस सजा से मुझे बुला ले
माँ वो लिसलिसा सा भाव
फिर से एक बार थमा दे
मैं सो नही पाता
इस आतंक के महौल मे
जिस दिन से तुने मुझे त्याग दिया
माँ एक बार फिर से,
अपनी कोख मे पनाह दे
मुझे इस दुनिया की बेरुखी से बचा ले
वो लिसलिसा अह्सास
एक बार फिर से थमा दे
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