बरसात होने वाली है Poem by Kezia Kezia

बरसात होने वाली है

बरसात होने वाली है

बरसात हो उससे पहले ही

तैयारी कर लो

खेतों की मेड़ बना दो

टूटी छतरी बनवा लो

झोपड़ी की टूटी हुई छत

का फूस बदल लो

इस साल भी रात कोने में

दुबक कर ना बितानी पड़े

इससे बेहतर है

सब इंतजाम पहले ही कर लो

यही अंजाम होता है

गरीबी से मुलाकात का

एक तो ग़मों की बरसात

ऊपर से मौसम की बरसात

एक से बच गये तो

अगली का मुकाबला कर लेंगें

सोकर भूखे पेट

बच्चों को निवाला खिला देंगें

बरसात होने वाली है

बरसात हो उससे पहले ही

तैयारी कर लो

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Sunday, April 16, 2017
Topic(s) of this poem: philosophical
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