भूली बिसरी यादें Poem by C. P. Sharma

भूली बिसरी यादें

मुझे अच्छी लगती
तेरी लेखिनी,
मुझे पसंद है
तेरा मुस्कुराना।

जब तुझे देखूँ
तलैय्या किनारे,
याद आता है
तेरा कमल खिलाना।

बचपन के दिन भी
वो क्या दिन थे,
तू उड़ती फिरती थी
तितली बन के।

चुपके से तेरा
पराग चुराना,
अभी भी तुझ में
बरक़रार है।

तू अभी भी
मेरे दिल का करार है,
तेरी वो यादें
समेटी हुई हैं।

मुझे अच्छी लगती
तेरी लेखिनी,
मुझे पसंद है
तेरा मुस्कुराना।

प्रेरणाा: Nabanita Bhuyan Mathew की कविता Illusion के साथ दी हुई ये तस्वीर।

भूली बिसरी यादें
Wednesday, April 19, 2017
Topic(s) of this poem: memories
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C. P. Sharma

C. P. Sharma

Bissau, Rajasthan
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