यायावर मन Poem by Kezia Kezia

यायावर मन

जो आज मैंने नहीं लिखा

वो फिर कभी नहीं लिख पाऊँगी

मन के भाव हर क्षण बदलते हैं

कल के भाव आज में नहीं आते

आज के भाव कल मे नही जायेंगे

मन यायावर है

एक जगह ठहरना इसकी नियती नहीं है

जो कल लिख चुकी

वो कल की ही नियती थी

वो फिर कभी नहीं लिख पाती

हर क्षण में निहित भाव

अपनी अपनी कविता गढ़ते हैं

आज की आज के लिये

कल की कल के लिये

एक दिन भी चूके, तो चूके

कोई नहीं जानता वो कहाँ

गुम हो जाती है

मन की किन गलियों में

छलांगे लगाती है

यायावर मन की कविता

हर दिन की तरह नित नई होती है

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Wednesday, May 10, 2017
Topic(s) of this poem: philosophical
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