जो आज मैंने नहीं लिखा
वो फिर कभी नहीं लिख पाऊँगी
मन के भाव हर क्षण बदलते हैं
कल के भाव आज में नहीं आते
आज के भाव कल मे नही जायेंगे
मन यायावर है
एक जगह ठहरना इसकी नियती नहीं है
जो कल लिख चुकी
वो कल की ही नियती थी
वो फिर कभी नहीं लिख पाती
हर क्षण में निहित भाव
अपनी अपनी कविता गढ़ते हैं
आज की आज के लिये
कल की कल के लिये
एक दिन भी चूके, तो चूके
कोई नहीं जानता वो कहाँ
गुम हो जाती है
मन की किन गलियों में
छलांगे लगाती है
यायावर मन की कविता
हर दिन की तरह नित नई होती है
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