ढेरों आज़माईशे हैं आजमाने को Poem by Kezia Kezia

ढेरों आज़माईशे हैं आजमाने को

एक कलम है

एक कागज है

और ढेरों जज़्बात हैं

उतारने को

एक दिल है

एक दिमाग है


और ढेरों हसरतें हैं

अंजाम पाने को

एक माहताब है

एक आफताब है

और ढेरों जिंदगियां हैं

रोशन होने को

एक फलक है

एक जमीन है

ढेरों ख्वाब हैं

पनाह पाने को

एक आब है

एक हवा है

और ढेरों नुमाइशे हैं

दीदार को

एक मैं हूँ

एक तुम हो

और ढेरों आज़माईशे है

आजमाने को

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Sunday, May 14, 2017
Topic(s) of this poem: philosophical
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