वह आती है
कुछ देर ठहर कर
चली जाती है
मैं कुछ कहता हूँ
वह सुनकर भी
अनसुना कर देती है
मैं फिर दोहराता हूँ
वह फिर अनसुना
कर देती है
वह कुछ नहीं कहती
मैं सुनना चाहता हूँ
मैं सुनना चाहता हूँ,
जिंदगी भर
फिर भी वह कुछ
नहीं कह पाती
वह डरती है
कहीं उसकी तरह
उसका कहा
मैं अनसुना ना कर दूँ
इस डर से
वह कभी कुछ भी
नही कहती
बस आती है
कुछ देर ठहर कर
चली जाती है
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