आगाज़ और अंजाम Poem by Kezia Kezia

आगाज़ और अंजाम

दो लफ़्ज काफी हैं

जिंदगी की गिरफ्त को

बयान करने के लिये

आगाज़ और अंजाम

आगाज जिंदगी का

फलसफा तैयार करता है

आबोहवा में जिंदगी की महक

घुलने तक रुतबा रखता है

तब अंजाम की बेकरारी

फानूस बन आती है

दो लफ़्ज काफी हैं

नुमाइंदो को कफिले तक

पहुचाने के लिये

क्योंकी

जिंदगी के उर्स में

हर आगाज़ का अंजाम होते देखा है

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Tuesday, May 16, 2017
Topic(s) of this poem: philosophical
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