दुनिया की इस भीड़ में Poem by Kezia Kezia

दुनिया की इस भीड़ में

दुनिया की इस भीड़ में
मैं भी भिड़ना चाहता हूँ
चेहरा वही रखता हूँ
सिर्फ नकाब बदल कर आता हूँ
*****

Sunday, May 21, 2017
Topic(s) of this poem: philosophical
COMMENTS OF THE POEM
Rajnish Manga 21 May 2017

वर्तमान की विडंबना यही है कि हर कोई किसी न किसी मुखौटे की आड़ लेना चाहता है- आत्मरक्षा के लिए भी और आक्रमण के लिए भी. इन पंक्तियों में इसी विचार की पुष्टि होती है.

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