बदल जाऊँ? Poem by Kezia Kezia

बदल जाऊँ?

पुराने हृद्य को तिरस्कृत कर

नूतन आभा को अपनाऊं

तुम चाहते हो कि

मैं भी इस जगत की तरह

बदल जाऊँ?

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Wednesday, June 14, 2017
Topic(s) of this poem: philosophical
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