भारत जैसी कर्म भूमि पर
होता नित एक सूर्य उदय
अन्धकार को मिटा कर
जग को करता प्रकाशमय
साहस रूपी प्राण देकर
हर लेता आतंक और भय
स्व अस्तित्व को मिटा कर
पाता है चिर जय जय जय।
ऐसा ही एक सूर्य उगा था
किया था जिसने फिरंगियों का नाश
नवयुवाओं को मार्ग दर्शा के
छिपा ली उसने अपनी ही लाश
होती न दशा ये देश की आज
यदि होता वो परमवीर काश
रह ना सका शरीर मगर
नाम शेष है तेरा सुभाष ।।
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He was an inspiration and hero to many.