नाम शेष है तेरा सुभाष Poem by Ahatisham Alam

नाम शेष है तेरा सुभाष

भारत जैसी कर्म भूमि पर
होता नित एक सूर्य उदय
अन्धकार को मिटा कर
जग को करता प्रकाशमय
साहस रूपी प्राण देकर
हर लेता आतंक और भय
स्व अस्तित्व को मिटा कर
पाता है चिर जय जय जय।

ऐसा ही एक सूर्य उगा था
किया था जिसने फिरंगियों का नाश
नवयुवाओं को मार्ग दर्शा के
छिपा ली उसने अपनी ही लाश
होती न दशा ये देश की आज
यदि होता वो परमवीर काश
रह ना सका शरीर मगर
नाम शेष है तेरा सुभाष ।।

नाम शेष है तेरा सुभाष
Wednesday, July 12, 2017
Topic(s) of this poem: patriotic,patriotism
POET'S NOTES ABOUT THE POEM
From the collection JAI SUBHAASH Year 1997-1999
COMMENTS OF THE POEM
Savita Tyagi 03 September 2017

He was an inspiration and hero to many.

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