Sunday, July 23, 2017

कौड़ी से भी जान यहाँ पे सस्ती है Comments

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कौड़ी से भी जान यहाँ पे सस्ती है
चारों तरफ़ सुनसान फ़िज़ा और पस्ती है
कोई ना खेबनहार भंवर में नैया का
घेरे हुआ तूफ़ान हमारी कश्ती है
...
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NADIR HASNAIN
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Rajnish Manga 23 July 2017

आज के हालात की सही निशानदेही करता है यह गीत. अद्वितीय रचना. Thanks.

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