Monday, August 7, 2017

बचपन और बुढ़ापे में अजब सा एक नाता है Comments

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बचपन और बुढ़ापे में अजब सा एक नाता है
लुटा कर ज़िन्दगी बच्चों पे बूढ़ा मुस्कुराता है

जिगर के ख़ून से सींचा शजर फलदार होने तक
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NADIR HASNAIN
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