कोई है जो होकर भी नहीं। Poem by Ahatisham Alam

कोई है जो होकर भी नहीं।

Rating: 5.0

कोई है जो होकर भी नहीं
और न होकर भी मुझमें बसा हो जैसे...
जिसकी शोखियाँ दर्द हैं
और ख़ामोशी भी सज़ा हो जैसे...

कोई है जो चुपके से बुलाता है मुझको
उसकी होठों पे मेरे लिए सदा हो जैसे...
उससे दूर होकर भी दूर नही हो सकता
कोई रिश्ता ऐसा जुड़ा हो जैसे...

मेरे दर्द को ज़माना समझ ही नही सकता
ये वो तोहफा है जो तुमसे मिला हो जैसे...
एक आलम है जो हर आलम से बेखबर है
उसकी आँखों में तेरा चेहरा हो जैसे...

Sunday, September 3, 2017
Topic(s) of this poem: love
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AS
COMMENTS OF THE POEM
Savita Tyagi 03 September 2017

बहुत खूब! Nice to read Hindi.Thanks for sharing.

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