तुम होते तो अच्छा होता
और सम्मा रंगीन होता
पानी की कल-कल से
जैसे संगीत में डूबा होता
तुम्हारा साथ जो होता
झूम उठता लम्हा सारा
चाहे धूप हो या छाऊ
रहे हरपाल का हौसला
कुछ कर गुजरने का
मगर शायद, ये कुदरत
को न गवरा की हम
खड़े हो अपने दम पर
चाहे जितना भी मुश्किल
हो हमारा कल
आज तो फिर भी है
दिन हिम्मतवालों का
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