माँ Poem by Sharad Bhatia

माँ

Rating: 5.0

माँ

"माँ" शब्द अथाह,
जिसकी कोई थाह नहीं है।।
फिर भी दो शब्द कहना चाहता हूँ,
अपनी दिल के ज़ज्बात बताना चाहता हूँ।।

क्यूँ तू सुबह से शाम तक एक पैर पर खड़ी रहती,
हमे खिलाने पर यूँही अड़ी रहती,
हमे सुलाकर खुद जगी रहती ।

हम तुझसे बात करे, या ना करे,
फिर भी तू हमारी फ़िक्र हमेशा करती रहती।।
जितना मर्जी हम तुझसे लड़े,
फिर भी तू बिल्कुल बुरा नहीं मानती।।
पर कोई हमे ज़रा सा भी बुरा कह तो दे,
तू तो बस उससे लड़ने के लिए हमेशा आतुर रहती।।

माना हम बड़े हो गये, , फिर भी तू हमे हमेशा बच्चा कहती,
और पल - पल की हमारी चिन्ता यूँही कर जाती ।।

पापा, हमे ज़रा सा डाँटे तो सही,
तो क्या शानदार तरीके से पापा के छक्के छुड़ाती,
फिर हमे बच्चा बताकर यूँही बचाती।।

हम ज़रा सा बाहर क्या जाते,
तू हमारी पल - पल की चिन्ता कर जाती।।
और रह - रह कर बाहर बालकनी मे खड़े होकर,
हमारे आने तक का इंतजार कर जाती।।

और जब हम घर वापस आते,
तो हमे देख कर हल्के से मुस्काती,
तब शायद तब तेरी जान मे जान आती।।
और हमे एक गिलास पानी पिला कर पूछती,
क्या खाओगे और फिर बनाने चली जाती।।

खुद भूखे रहकर हमारा पेट भराया,
देखों जग मे हमने इतनी सुन्दर "माँ" को पाया।।

और क्या लिखूँ "माँ" के बारे में,
"माँ" ने मुझे लिखा।।

एक बहुत ही प्यारा सा एहसास
मेरी नन्ही कलम से - "माँ" को समर्पित
(शरद भाटिया)

माँ
Saturday, July 25, 2020
Topic(s) of this poem: emotions,feelings,love,mother and child ,sacrifice
POET'S NOTES ABOUT THE POEM
This poem is not only a poem, it is a internal feeling about "Mother"
COMMENTS OF THE POEM
Rajnish Manga 30 July 2020

The affection of three generations is on display here in this poem as well as the lovely picture below the poem.

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Rajnish Manga 30 July 2020

There is no end to a mother's qualities.You go on writing but it will not stop. This poem is a great tribute to a great mother from a grateful son. Thanks.

0 0 Reply
Varsha M 26 July 2020

Beautiful penning a gentle humble mother. Your description is just vivid. A mother is that gentle.

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Aarzoo Mehek 25 July 2020

Very very sensitive and beautiful tribute to motherhood. Nice picture Sharad. Give my regards to your mom.10++

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