कहकशा Poem by Varsha M

कहकशा

तारों की दुनिया है निराली
सोये जब जहा सारी
टिमटिमाये ये तारा प्यारी।।

अंजन सुन्हेरी गलियों में
ले चले हाथ थामे
मानो जैसा साथी हो हमारे।।

गुमनाम अनजान वो गालियां
लगी ही नहीं कभी आउट ऑफ़ दुनिया
मानो जैसे हम हो वो हो
और ये खिलखिलाते तरे।।

गलिया खुशहालीयों वाली
गालियां बढ़ोशियो वाली
ना जाने कहां चुरा ले गए
मेरी ये रुसवाई।।

न खट्टा मन न पीस्ता तन
बस जो है वो है भोला मन
जो बुनता ख्याल अनंत
चाहे हो दिन या फिर रात।।

POET'S NOTES ABOUT THE POEM
Dreams are inspiration to life so do dream and do make them become real।
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