इक राज़ Poem by Anita Sharma

इक राज़

देर लगी आने में मुझको, जा और कोई दुनिया तलाश कर
ऐ इश्क़ हम तो अब तेरे काबिल नहीं रहे।मुझको अब गहरा सा इक राज़ बना लो..! !

इक राज़
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